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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम

नेशनल टेक्संटाइल कार्पोरेशन लिमिटेड

नेशनल टेक्सकटाइल कार्पोरेशन लिमिटेड (एनटीसी), वस्त्रं मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र का केंद्रीय उपक्रम है जिसे उन निजी क्षेत्र के रुग्णम वस्त्र उपक्रमों के कार्यों का प्रबंधन करने के लिए अप्रैल, 1968 में शामिल किया गया था जिनका अधिग्रहण सरकार द्वारा किया गया था। वर्ष 1968 में 16 मिलों से शुरूआत करके इसकी संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि होते हुए वर्ष 1972-73 में 103 तक हो गई। वर्ष 1974 में इन सभी इकाइयों को रुग्णह वस्त्र उपक्रम (राष्ट्री यकरण) अधिनियम, 1974 के तहत राष्ट्री यकृत किया गया था। इन इकाइयों की संख्या 1995 तक बढ़कर 119 हो गई। इन 119 मिलों को समय-समय पर जुटाई गई 10 करोड़ रुपए (1.81 मिलियन अमरीकी डॉलर) की प्राधिकृत पूंजी से 9 अनुषंगी निगमों की सहायता से एनटीसी लि. द्वारा नियंत्रित किया जाता था। यह राशि अब लगभग 7,000 करोड़ रुपए (1.27 बिलियन अमरीकी डॉलर) हो गई है और निगम की प्रदत्त शेयर पूंजी लगभग 4,000 करोड़ रुपए (727 मिलियन अमरीकी डॉलर) हो गई है। कम हुई मिलों की संख्याह और समकालीन उद्योग की प्रवृत्ति को देखते हुए सभी 9 सहायक कंपनियों को नई दिल्लीा स्थित एनटीसी मुख्या्लय में मिला दिया गया है जिससे यह दिनांक 01.04.2006 से एक कंपनी हो गई है। एनटीसी ने अब तक 78 मिलों को बंद कर दिया है और पुद्दुचेरी राज्य की दो मिलों को राज्या सरकार को स्थाोनांतरित कर दिया है। एनटीसी को अपनी अधिशेष परिसंपत्तियों की बिक्री से धनराशि जुटाकर स्वंयं ही अपनी सभी मिलों का आधुनिकीकरण करना है और पांच मिलों को निगमों के साथ संयुक्तर उद्यम में रखा गया है। एनटीसी ने अहमदाबाद (गुजरात), अचलपुर (महाराष्ट्रउ) और हसन (कर्नाटक) के एसईजेड क्षेत्र में एक-एक और कुल मिलाकर तीन कंपोजिट टेक्सिटाइल ग्रीनफील्ड( यूनिटें स्थारपित की हैं।

एनटीसी ने विश्वू की प्रमुख कंपनियों के साथ संयुक्त। उद्यम में तकनीकी वस्त्रर परियोजनाएं स्थाेपित करने की पहल शुरू कर दी है और वह इस दिशा में कार्य कर रहा है।

पता:
स्कोप कॉम्लेइस
कोर-IV, 7, लोदी रोड,
नई दिल्ली् – 110003

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भारतीय हस्त शिल्प0 और हथकरघा निर्यात निगम लि. (एचएचईसी)

टैक्सयप्रोसिल:- भारतीय कॉटन टेक्स टाइल्सं का अंतरराष्ट्री य चेहरा है। भारतीय हस्त्शिल्प6 और हथकरघा निर्यात निगम लि. (कार्पोरेशन) वस्त्रस मंत्रालय के प्रशा‍सनिक नियंत्राधीन भारत सरकार का उपक्रम है। इसे वर्ष 1958 में हस्तशशिल्पु और हथकरघा उत्पाादों के (i) निर्यात संवर्धन और (ii) व्या.पार विकास के दोहरे उद्देश्य से ‘भारतीय हस्तसशिल्पी विकास निगम लि.’ के रूप में स्थारपित किया गया था। वर्ष 1962 में इसे ‘भारतीय हस्तपशिल्प और हथयकरघा निर्यात निगम लि.’ के रूप में नया नाम दिया गया था। इस समय सोने और चांदी के आभूषण/वस्तुयओं का निर्यात करने के अलावा निगम के दो शीर्ष निर्यात गृह हस्तीशिल्पश और हथकरघा उत्पाकदों (हाथ से बुने ऊनी कालीन और सिले-सिलाए परिधान सहित) का निर्यात कर रहे हैं। कंपनी के पास भारतीय हस्त्शिल्पथ, भारतीय हथकरघा, भारतीय सजावटी वस्तुेओं, प्राचीन भारतीय वस्तुभओं, चमड़े की सजावटी वस्तुाओं, जवाहरातों और आभूषणों, गढ़े हुए लौह हस्ततशिल्पों की व्यावपक रेंज है। एचएचईसी में उत्पाीदों की गुणवत्ताु और वास्तूविकता सुनिश्चित की जाती है।

पता:
भारतीय हस्तकशिल्पि और हथकरघा निर्यात निगम लि.
जवाहर व्यातपार भवन, 1 टॉल्स्टॉनय मार्ग, नई दिल्ली - 110001

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राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनएचडीसी)

भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम,1956 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में फरवरी, 1983 में लखनऊ में राष्ट्री य हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) लि. की स्थाधपना की गई थी। एनएचडीसी लि. की प्राधिकृत पूंजी 2000 लाख रुपए है और इसकी प्रदत्तर पूंजी 1900 लाख रुपए है। एनएचडीसी का मुख्यप उद्देश्यह हथकरघा क्षेत्र के लाभ के लिए सभी प्रकार के यार्न की आपूर्ति का कारोबार करना, हथकरघा क्षेत्र के लिए आवश्यशक अच्छी किस्मल के रंगों और इससे संबंधित सामग्रियों की आपूर्ति करने की व्येवस्थाआ करना, हथकरघा फैब्रिक के विपणन का संवर्धन करना, हथकरघा क्षेत्र के लिए आधुनिकीकरण कार्यक्रम प्रौद्योगिकी के कार्य करने सहित हथकरघा फैब्रिक के उत्पाहदन से जुड़ी परियोजनाओं की सहातया करना और उन्हेंे क्रियान्वित करना है।

पता:
10वीं और 11वीं मंजिल, विकास दीप,
22 स्टेदशन रोड, लखनऊ-226001

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भारतीय कपास निगम (सीसीआई)

जून, 1985 की वस्त्रष नीति के अंतर्गत सीसीआई को ये भूमिका सौंपी गई थी: 1. जब कभी कपास की बाजार की कीमतें, भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्यी को छूती है तो किसी भी प्रकार की मात्रात्मकक सीमा के बगैर मूल्यर समर्थन अभियान चलाना 2. केवल सीसीआई के जोखिम पर वाणिज्यिक अभियान चलाना 3. सीसीआई को दिए गए पूरे निर्यात कोटे की कपास खरीदना। सीसीआई को दी गई उपर्युक्ते भूमिका वर्ष 2000 की नई वस्त्र नीति में भी जारी रही। तथापि, अंतिम उल्लिखित कार्य अब प्रासंगिक नहीं रहा क्यों कि कपास के निर्यात को मुक्त कर दिया गया है और सरकार अब कोटा जारी नहीं कर रही है। इसके बावजूद, कपास का निर्यात करने के लिए सीसीसआई अभी भी कपास खरीदता है। कपास मौसम 2013-14 में सीसीआई ने आंध्र प्रदेश में कपास की 40,813 गांठों की खरीद कर एमएसपी अभियान चलाए। सीसीआई ने कपास का उत्पाआदन करने वाले राज्योंक में एकीकृत कपास फसल (संविदा खेती) को लागू करके विगत वर्ष के 48,147 हेक्टेायर की तुलना में 48,495 हेक्टेवयर क्षेत्र को संविदा खेती के अंतर्गत लगाया गया।

सीसीआई अभियानों में देश में कपास उगाने वाले सभी राज्यै आते हैं। जिन उत्तारी क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और राजस्थागन, मध्यय क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र् और मध्यि प्रदेश तथा दक्षिण क्षेत्र में ओडिशा सहित आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु आते हैं।

पता:
‘कपास भवन’, प्लॉ,ट नं. 3-ए,
सेक्टपर 10, पोस्टॉ बॉक्सन नं. 60, सीबीडी बेलापुर,
नवी मुम्बभई-400614 (महाराष्ट्रु)

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सेंट्रल काटेज इंडस्ट्रीरज कारपोरेशन ऑफ इंडिया लि.

दिल्लीस में सेंट्रल काटेज इंडस्ट्रीलज एम्पोतरियम की स्थािपना भारतीय सहकारी संघ के प्रबंधन में वर्ष 1952 में की गई थी जिसे बाद में वर्ष 1964 में सेंट्रल काटेज इंडस्ट्रीगज एसोसिएशन में अधिगृहीत कर लिया था तथा दिनांक 4 फरवरी, 1976 को सेंट्रल काटेज इंडस्ट्रीीज कारपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (सीसीआईसी) के रूप में निगमित किया गया था। सीसीआईसी, वस्त्रं मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। सीसीआईसी का मुख्यम उद्देश्य अच्छी् किस्मव के भारतीय हस्त शिल्पन और हथकरघे के डीलर, निर्यातक, विनिर्माता और एजेंट के रूप में कार्य करना है तथा भारत और विदेशों में इन उत्पाैदों के लिए बाजार विकसित करना है। सीसीआईसी के दिल्लीं, कोलकाता, मुम्बपई, बैंगलूरू, चैन्न ई और हैदराबाद में शोरूम हैं।

पता:
जवाहर व्यादपार भवन, जनपथ, नई दिल्लील-110001

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ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन लिमिटेड

ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन लिमिटेड को 24 फरवरी, 1920 में सार्वजनिक क्षेत्र की लिमिटेड कंपनी के रूप में निगमित किया गया था। इसे भारत सरकार ने ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन लिमिटेड (शेयरों का अधिग्रहण), अध्यािदेश के तहत दिनांक 11 जून, 1981 को अपने हाथ में लिया। बीआईसी लि. कानपुर की दो ऊनी मिलें अर्थात (i) कानपुर ऊनी मिल शाखा, कानपुर (ii) न्यू। इगर्टन ऊनी मिल शाखा, धारीवाल हैं और यह उनका प्रबंधन भी करती है। इन दो मिलों के उत्पांदों के लोकप्रिय ब्रांड नाम क्रमश: ‘लाल इमली’ और ‘धारीवाल’ हैं। ये मिलें ऊनी/ब्लेंूडेड सूटिंग, ट्वीड्स, यूनिफार्म क्लॉकथ, लोई, शॉल, कालीन, कंबल आदि का विनिर्माण करती है, वित्ती य स्थिति के आधार पर बीआईसी लिमिटेड का आधुनिकीकरण/पुनर्वास करती हैं। वर्ष 1992 में बीआईसी लिमिटेड का मामला बीआईएफआर के पास भेजा गया था और इसे रुग्ण् कंपनी के रूप में घोषित किया गया था। वर्ष 2002 में 211 करोड़ रुपए की कुल लागत से बीआईएफआर ने पुनर्वास योजना अनुमोदित की थी।


भारतीय पटसन निगम (जेसीआई) लि.

जेसीआई वर्ष 1971 में स्था पित, भारत सरकार उद्यम है। जेसीआई, वस्त्र मंत्रालय की सरकारी एजेंसी है जो पटसन उत्पा1दकों के लिए एमएसपी नीति क्रियान्वित करती है और कच्चेै पटसन के बाजार में स्थिर एजेंसी के रूप में कार्य करती है। जेसीआई, वाणिज्यिक अभियान भी चलाता है, लाभ अर्जित करने के लिए वाणिज्यिक दृष्टि से एमएसपी से अधिक कीमत पर पटसन की खरीद करती है। जेसीआई के मूल्यष समर्थन अभियानों में, जब कभी पटसन की प्रचलित बाजार की कीमत एमएसपी से कम हो जाएं तो किसी भी प्रकार की मात्रात्मंक सीमा के बगैर एमएसपी पर छोटे और सीमांतिक किसानों से कच्चेए पटसन की खरीद करना शामिल है। इन अभियानों से कच्चेए पटसन की कीमतों में अंतर-मौसमी और अंतरा-मौसमी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए अधिक आपूर्ति का दूसरे स्थाोनों पर उपयोग करके बाजार में राष्ट्रीसय बफर का सृजन करने में सहायता मिलती है। जेसीआई के विभागीय खरीद केंद्र (डीपीसी), जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होते हैं, किसानों से सीधे ही कच्चेर पटसन की खरीद करते हैं। जेसीआई के लगभग 171 डीपीसी हैं जिनमें से 101 डीपीसी पश्चिम बंगाल में, 26 असम में, 20 बि‍हार में और शेष पटसन उगाने वाले दूसरे राज्योंस आंध्र प्रदेश, ओडिशा और त्रिपुरा में हैं। वर्ष 2014-15 (19.01.2015 तक) के दौरान जेसीआई ने एमएसपी अभियानों से 0.154 लाख गांठों की खरीद की। दिनांक 31.03.2014 के अनुसार कारपोरेशन की प्राधिकृत और चुकता पूंजी 5 करोड़ रुपए और कुल मूल्य 86.37 करोड़ रुपए है। समग्र प्राधिकृत पूंजी, भारत सरकार द्वारा अभिदत्त की गई है।

पता:
15, एन. 7वीं मंजिल, नेली सेनगुप्ता सरणी,
न्यूर मार्केट, कोलकाता- 700087

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राष्ट्रीय पटसन विनिर्माता निगम लि.

राष्ट्री य पटसन विनिर्माता निगम लि. (एन.जे.एम.सी.) को भारत सरकार के पूर्ण स्वायमित्व0 वाले उपक्रम के रूप में दिनांक 3 जून, 1980 को पंजीकृत और/या निगमित किया गया था‍ जिसमें छ: (6) पटसन मिल अर्थात पश्चिम बंगाल में नेशनल, किन्नी सन, खरदाह, अलेक्जें ड्रा, यूनियन और कटिहार , बिहार में यूनिट आरबीएचएम शामिल है। कंपनी का मुख्यी उद्देश्यस सरकार की खाद्य प्रसंस्क)रण एजेंसियों को आपूर्ति करने के लिए पटसन माल (बोरों) के विनिर्माण का कारोबार करना है। कंपनी को आरंभ से ही हो रही लगातार हानि और कुल मूल्यी में ह्रास होने के कारण इसका मामला वर्ष 1992 में बीआईएफआर को भेजा गया था। वस्त्र मंत्रालय ने वर्ष 2003-04 में इन मिलों के प्रचालन रोक दिए थे। तथापि, वस्त्रय मंत्रालय के दस्ताावेज से बीआईएफआर ने दिनांक 19 मार्च, 2010 और 25 नवम्बथर, 2010 के मंत्रिमंडल के निर्णय को ध्यामन में रखते हुए छ: पटसन मिलों में से तीन मिलों (पश्चिम बंगाल में किन्नी।सन, खरदाह और कटिहार, बिहार में यूनिट आरबीएचएम) को एनजेएमसी द्वारा चलाए जाने के लिए दिनांक 31.03.2011 को हुई अपनी बैठक में कंपनी के पुनरुद्धार प्रस्ताएव का अनुमोदन किया। इन मिलों के कार्य वर्ष 2003-04 में रोक दिए गए थे और इस वर्ष से पहले मंजूर की गई योजना के अनुसार सभी कामगारों और स्टायफ को वीआरएस दी गई थी। संविदा के आधार पर श्रमिकों को रखकर वर्ष के दौरान उत्पा दन शुरू करने के लिए एचटी पावर लाइन को बहाल करने, फैक्ट्री शेड, गोदाम, कार्यालयों की मरम्म त करने और संयंत्र तथा मशीनरी और अन्य विनिर्माण करने वाली मशीनों की मरम्मशत करने के पूरे प्रयास किए गए और यह जानकर प्रसन्न ता होती है कि वर्ष के दौरान उक्तर सभी तीनों मिलों में नियमित उत्पामदन शुरू हो गया है। एनजेएमसी, जेसीआई से कच्ची पटसन खरीद रही है और बोरों का विनिर्माण कर रही है जिसे पटसन आयुक्ती के कार्यालय द्वारा समय-समय पर जारी पीसीओ के अनुसार सरकार की खाद्यान्नस प्रापण एजेंसियों को भेजा जाता है।

पता:
चार्टर्ड बैंक बिल्डिंग,
दूसरी मंजिल, 4 नेताजी सुभाष रोड,
कोलकाता


बर्ड्स जूट एंड एक्सपोर्ट्स लि. (बीजेईएल)

पटसन फैब्रिक की प्रसंस्केरण यूनिट, बर्ड्स जूट एंड एक्सकपोर्ट्स लि. (बीजेईएल), एनजेएमसी की सहायक कंपनी है जो वर्ष 1904 में स्था पित बर्ड एंड कंपनी की सहायक कंपनी थी। भारी उद्योग मंत्रालय की भारत प्रोसेस एंड मकैनिकल इंजीनियर्स लि. (वीपीएमईएल) ने वर्ष 1980 में राष्ट्री यकरण होने पर इसकी परिसंपत्तियों को अपने अधिकार में ले लिया और यह बीजेईएल की 58.94% इक्विटी शेयरों की धारक हो गई। इसके बाद भारत सरकार ने बीजेईएल के शेयरों को एनजेएमसी अं‍तरित करने का निर्णय लिया। बीजेईएल ने पटसन और ब्लेंतडेड फैब्रिक की ब्लीएचिंग, डाइंग और प्रिंटिंग की प्रसंस्कऔरण यूनिट के रूप में कार्य किया। इसको हो रही निरंतर हानियों और नकारात्मतक निवल मालियत के कारण बीआईएफआर ने वर्ष 1999 में रुग्ण् ‍ औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 3(1)(0) से इसे रुग्णह घोषित कर दिया। हाल ही में उक्तऔ अधिनियम की धारा 17(3) के तहत पुनर्वास योजना तैयार करने के लिए परिचालन एजेंसी के रूप में आईडीबीआई बैंक लि. को नियुक्त किया गया था।

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